किसी छोटे से गाँव में नन्हा टिल्लू रहता था। टिल्लू को रात में चाँद को देखना बहुत पसन्द था। वह रोज़ अपनी दादी से एक ही बात पूछता—
“दादी, चाँद मेरे पास क्यों नहीं आता? मैं उससे दोस्ती करना चाहता हूँ!”
दादी हँसकर कहतीं,
“अरे पगले, चाँद सबसे ऊँचे आसमान में रहता है। वहाँ पहुँचने के लिए बहुत लम्बी छलाँग लगानी पड़ेगी।”
टिल्लू ने सोचा— “अगर छलाँग चाहिए, तो मैं ऐसी चप्पल बनाऊँगा जो मुझे आसमान तक उछाल दे!”
👟 जादुई योजना
अगली सुबह टिल्लू घर के बाहर टूटे हुए टायर, लकड़ी के टुकड़े और रबर की पट्टियाँ इकट्ठी करने लगा।
माँ ने पूछा,
“ये सब क्या कर रहा है?”
टिल्लू बोला,
“माँ! मैं चाँद वाली चप्पल बना रहा हूँ। आज चाँद से मिलने जाना है!”
माँ हँसते-हँसते बोलीं,
“ठीक है, बस ध्यान रखना! आसमान से सीधे मेरे किचन में मत गिर जाना।”
पूरा दिन मेहनत करके टिल्लू ने दो बड़ी, अजीब-सी चमकदार चप्पल बना लीं।
🌜 उड़ने की पहली कोशिश
रात हुई। चाँद पूरा और गोल था।
टिल्लू बोला—
“चाँद भाई! मैं आ रहा हूँ!”
उसने चप्पल पहनी…
एक…
दो…
तीन…
धड़ाम!!
टिल्लू सीधे गोभी के खेत में जाकर गिरा।
सारा खेत हिल गया, और टिल्लू गोभी के पत्तों में फँस गया।
लेकिन टिल्लू ने हार नहीं मानी।
उसने चप्पल ठीक की और फिर कोशिश की।
✨ चाँद की आवाज़
जब टिल्लू तीसरी बार छलाँग लगाने वाला था, तभी अचानक आसमान से एक हल्की सी आवाज़ आई—
“टिल्लू… तुम नीचे ही बहुत अच्छे हो। मुझे देखने के लिए तुम्हें ऊपर आने की ज़रूरत नहीं।”
टिल्लू चारों तरफ देखने लगा।
“कौन? कौन बोल रहा है?”
आवाज़ मुस्कुराई—
“मैं हूँ… चाँद!
तुम इतने प्यारे हो कि मुझे तुम्हारी छलाँग नहीं, तुम्हारी मेहनत पसंद आई। इसलिए मैं खुद तुम्हारे घर के पास आ गया।”
टिल्लू ने आसमान देखा—
वाकई आज चाँद पहले से ज़्यादा नीचे, एकदम उसके गाँव के ऊपर था!
🌾 गाँव में हलचल
गाँव के लोग हैरान थे।
सब बोले— “आज चाँद इतना नीचे कैसे आ गया?”
टिल्लू हँसकर बोला—
“क्योंकि मैं उससे मिलने की बहुत कोशिश कर रहा था!”
चाँद हँसते हुए बोला—
“दुनिया में कोशिश करने वाले बच्चे बहुत कम हैं। इसलिए मैंने सोचा, मैं ही चलकर उसके पास आ जाऊँ।”
उस रात पूरा गाँव चाँदनी से जगमगा उठा।
🌟 मोरल:
जो बच्चे सपने देखते हैं और कोशिश करते हैं, दुनिया खुद उनके करीब आ जाती है।
